मीना कुमारी
[ग़ज़ल] मीना कुमारी की ग़ज़लें
आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में…
वह बार-बार अपने प्रतिरूप को दर्पण में निहार रही थी... मन सपनों के नवीन नीड़ बनाने को आतुर था। वह पंछी की तरह आसमान में सुदूर उड़ जाना चाहती...इतनी ऊँचा…
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मीना कुमारी
आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में…
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