विरासत में अमरकांत की कहानी डिप्टी कलेक्टर
शकलदीप बाबू कहीं एक घंटे बाद वापस लौटे। घर में प्रवेश करने के पूर्व उन्होंने ओसारे के कमरे में झाँका, कोई भी मुवक्किल नहीं था और मुहर्रिर साहब भी गायब थे।
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----------देस परदेस में ‘अन्तोन चेखव’ की ‘गिरगिट’
पुलिस का दारोगा ओचुमेलोव नया ओवरकोट पहने, बगल में एक बण्डल दबाये बाजार के चौक से गुजर रहा था। उसके पीछे-पीछे लाल बालोंवाला पुलिस का एक सिपाही हाथ में एक टोकरी लिये लपका चला आ रहा था।
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----------भाषा सेतु में रस्किन बॉन्द की पतंगसाज महमूद
गली रामनाथ में वह एकलौता बरगद का पेड़ था जो एक वीरान पड़ी मस्ज़िद की दरारों से होकर निकल आया था ------ और एक छोटे से बालक अली की पतंग उसकी टहनियों में फँस गई थी।
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लेखन प्रक्रिया में नवीन कुमार नैथानी
अगर मुझसे पूछा जाये कि सबसे ज्यादा राहत कब मिलती है तो ज्यादातर बार मेरा जवाब होगा जब कोई मुझे लिखने के काम से कोई थोड़ी सी मोहलत दे दे!
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----------सरस्वती माथुर के हाईकू
भोर किरण
सूरज का सृजन
धूप जीवन
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---------- पद्मा शर्मा की कहानी सौदामिनी
वह बार-बार अपने प्रतिरूप को दर्पण में निहार रही थी... मन सपनों के नवीन नीड़ बनाने को आतुर था। वह पंछी की तरह आसमान में सुदूर उड़ जाना चाहती...इतनी ऊँचाई पर जहाँ से पृथ्वी का सब कुछ अदृश्य रहे...।
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----------मैंने पढी किताब में अरुणकमल की शंख महाशंख
अरुण कमल समकालीन हिंदी कविता साहित्य में एक प्रतिष्ठित नाम है. चार काव्य संग्रहों के सम्रद्ध रचना संसारके बाद “मैं हूँ शंख महाशंख” नाम से उनका पाँचवा काव्य संग्रह, राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है.
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मैं अपने बड़े भाई के पास 1993 में गोरखपुर गया हुआ था। ड्राइंगरूम में ही बैठा था कि दरवाजा खुला और एक भव्य सी दिखने वाली लगभग पैंतीस बरस की एक महिला भीतर आयी.....
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---------- मीना कुमारी की कुछ ग़ज़लें
आगाज़ तॊ होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वॊ नाम नहीं होता
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----------- संस्मरण में रुपसिंह चंदेल की प्रस्तुति – सुबराती खाँ
घुटनों तक सफेद लांगक्लाथ की बड़ी जेबों वाली कमीज, टखनों तक उठंग पायजामा और पैरों में चमड़े की चप्पलें…जब भी मैंने उन्हें देखा इसी वेशभूषा में.
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देवमणि पाण्डेय की ग़ज़ल
देवमणि पाण्डेय की ग़ज़ल
घास-पात और खोइया ग़ायब
पोखर, ताल, तलैया ग़ायब
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आओ धूप में सजीव सारथी की ग़ज़लें
पहचान लेता है चेहरे में छुपा चेहरा – मुखौटा,
मुश्तैद है, तपाक से बदल देता है चेहरा – मुखौटा।
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